त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण का चुनाव प्रचार चरम सीमा पर पहुंच गया है। क्योंकि 24 जुलाई को इन प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटी में जमा होने वाली है। यहां हम आज उत्तरकाशी जिले के भंकोली वार्ड पर बात कर रहे है। यह जिला पंचायत वार्ड इस वक्त महिला आरक्षित है। इससे पूर्व भी इस वार्ड की जिला पंचायत सदस्य अनुसूचित जाति महिला आरक्षित थी।
यदि आप प्रत्याशियों से बात करेंगे तो वे अपनी जीत का पक्का दावा कर रहे हैं। तियां गांव की प्रियंका थपलियाल सुशील व्यवहार से जानी जाती है। इनके पति संजय थपलियाल भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता है और क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार संघर्ष करते दिखाई देते है। संजय थपलियाल पिछले 10 वर्षों से अपने क्षेत्र में लगातार सामाजिक गतिविधियां करते रहते है। सामूहिक कार्यों से लेकर व्यक्तिगत कार्यों के लिए संजय थपलियाल हर जगह खड़े दिखाई देते है। संजय थपलियाल की गतिविधियों को प्रियंका थपलियाल इस वक्त मतों में परिवर्तित करना चाहती है। यही नहीं इस परिवार की पृष्ठभूमि पूर्व से ही क्षेत्र में राजनीतिक रही है। जिसका फायदा प्रियंका को मिलने की पूरी संभावना है।
इसी तरह नेहा थपलियाल भी अपनी जीत पक्की बता रही है। नेहा के लिए उपली खत यानी 6 गांव के लोगों ने सहमति बनाई थी कि उनके क्षेत्र से एक मात्र प्रत्याशी नेहा थपलियाल ही रहेगी। वैसे भी इस उपली खत में लगभग 2400 से अधिक मतदाता है। यही नहीं नेहा थपलियाल के ससुराल पक्ष को क्षेत्र में विनोदी व्यवहार से जाना जाता है। साथ ही नेहा थपलियाल के पति विपिन थपलियाल शिक्षक है तथा विपिन थपलियाल के बड़े भाई अपने गांव दारसौ के पूर्व में प्रधान रह चुके है। जिनकी कार्यों की उपली खत क्षेत्र में खास पहचान है। इधर नेहा के पिताजी शक्ति प्रसाद सेमवाल प्रख्यात ज्योतिषविद् है जिनकी संपूर्ण यमुना घाटी में विशिष्ट पहचान है। इसलिए नेहा थपलियाल इन सभी गतिविधियों को समेटती हुई अपनी जीत पक्की बता रही है। उपली खत के हिमरोल गांव से संतोषी राणा के मतों के आंकड़े अपने प्रतिद्वंदियों से कई आगे बताए जा रहे है। संतोषी राणा के पति जगमोहन सिंह राणा की पहचान क्षेत्र में एक उत्कृष्ट उद्यान विशेषज्ञ और युवा उद्यमी के रूप में है। जगमोहन ने कई युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उत्कृष्ट कार्य किए है। जबकि जगमोहन सिंह राणा के पिता स्व० भरत सिंह राणा सम्पूर्ण यमुना घाटी ही नहीं अपितु राज्य के विख्यात व्यक्तित्व रहे है। इसके अलावा उपली खत में स्व० राणा की एक खास प्रकार की पहचान रही है। इन सभी संभावनाओं को देखते हुए संतोषी राणा ने अपनी जीत का दावा किया है।
जरड़ा गांव निवासी संगीता चौहान भी कहां अपने प्रतिद्वंदियों से पीछे रह सकती है। संगीता चौहान पूर्व में क्षेत्र पंचायत सदस्य रह चुकी है। जबकि संगीता चौहान के पति प्रताप सिंह चौहान भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि लंबे समय से क्षेत्र में लोगो की हर समस्या के समाधान के लिए लड़ते दिखाई दिए है। अपने पांच साल के क्षेत्र पंचायत सदस्य के कार्यकाल को संगीता चौहान मतों में परिवर्तित करना चाहती है।
लिहाजा भंकोली वार्ड में पहले चरण में चुनाव होने है। इस तरह अब प्रत्याशियों ने अपना अपना चुनाव प्रचार 24 घंटे का कर दिया है। रातदिन एक करके अपने अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे है। भंकोली वार्ड से चुनावी मैदान में उतरी नेहा थपलियाल, संतोषी राणा, प्रियंका थपलियाल और संगीता चौहान इस सीट पर अपनी अपनी जीत पक्का बता रही है।
अलावा इसके यदि राजनीतिक दलों के हिसाब से भंकोली वार्ड का मूल्यांकन करेंगे तो यहां चारों प्रत्याशी भाजपा पृष्ठभूमि के है। चारों प्रत्याशियों के पति या परिवार का कोई न कोई सदस्य भाजपा के ही इर्द गिर्द अपनी अपनी कार्यशैली को आगे बढ़ाते रहे है। तो कह सकते है कि इस वार्ड में मतदान राजनीतिक पार्टी के हिसाब से नहीं होने वाले है। इस वार्ड में सर्वाधिक मतदान रिश्तेदारी के हिसाब से होंगे। जिनका आंकड़ा इन चारों के पक्ष में बराबर दिखाई दे रहा है। यानी क्षेत्रवाद और जातिवाद इस वार्ड में कोई मायने नहीं रखता है।
दरअसल भंकोली वार्ड से जो चार प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। वे किसी से कम नहीं है। अमूमन सभी महिला प्रत्याशी स्नातक पढ़ी लिखी है। अच्छी हिंदी और अच्छा भाषण देने में यह प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंदी से अपने को एक कदम आगे बता रही है। जातीय समीकरण को देखते हुए दो प्रत्याशी ब्राह्मण एवं दो प्रत्याशी राजपूत समुदाय से इस चुनावी नाव पर सवार है। यह चुनावी नाव किसको पार लगाएगी यह तो समय की गर्त में है। मगर जीत की गणित इन चारों ने अपने अपने पक्ष में बात दी है।
इस सीट पर यदि जाति के आंकड़े जोड़ दें तो ब्राह्मण और राजपूत मतदाता लगभग बराबर है। इतने ही मतदाता अनुसूचित जाति के है। इसलिए चारों प्रत्याशी अनुसूचित जाति के मतों को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस सीट पर अनुसूचित जाति के सर्वाधिक मतदाता कफनौल और सिमलसारी गांव में है। बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार के तमाशे देख रहे अनुसूचित जाति के ही मत निर्णायक होंगे। जबकि जिस समुदाय से यह प्रत्याशी आते है उस समुदाय के मतदाता अमूमन 50 – 50 के हिसाब से दिखाई दे रहे है। यह भी कह सकते है कि ब्राह्मण और राजपूत आमने सामने और लाल तमाशबीन बने है।
उल्लेखनीय यह है कि जिला पंचायत भंकोली वार्ड में कफनौल, थोलिंका, दारसौ, सिमलसारी, गैर, हिमरोल, संगोली, कलोगी, धारी, पालुका, तियां, मानड़ गांव, नरयुंका, खाबला, पमाड़ी, बजलाड़ी, ज़रड़ा, छुड़ी, तेड़ा, कुआं, भंकोली, छमरोटा, थली आदि गांवों को मिलाकर लगभग 9 हजार से भी अधिक मतदाता है।







