Thursday, May 14, 2026
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अखरोट के बाग विकसित करने की आसान व विश्वसनीय विधि।

अखरोट के बाग विकसित करने की आसान व विश्वसनीय विधि।

By – Dr. Rajendra kuksal

उतराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में 1500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों मै खेतो के किनारे गधेरों के आसपास नम स्थानों पर प्रत्येक गांव मै अखरोट के पौधे नज़र आते हैं। बगीचे के रुप मै अखरोट के बाग राज्य में कम ही दिखने को मिलते हैं । इसके कई कारण हैं।

1- कलमी पौधों की उपलब्धता का न होना ।

2-Re-establishment problem यानी नर्सरी से पौधे उखाड कर खेतों मै लगाने पर अधिक मृत्युदर (50-60 %) का होना।

3-Long gestation period याने पौध रौपण के 12-15 वर्षो बाद रोपित पौधों मै फल आना।

4- उधान विभाग, विभिन्न परियोजनाओं तथा संस्थाऔ द्वारा आपूर्ति किये गये अखरोट के बीजू /कलमी पौधौ की विश्वसनीयता का ना होना आदि कई ऐसे कारण हैं जिससे उतराखण्ड मै अखरोट के उधान विकसित नही हो पा रहे हैं।

यदि आपको अखरोट के कलमी पौधे उपलब्ध नहीं हो पा रहें तो आप इस विधि से अखरोट के बाग विकसित कर सकते हैं। विभागौं व संस्थाओं द्वारा योजनाओं में आपूर्ति किए गए बीजू पौधों की कोई विश्वसनीयता नहीं है अधिकतर काठी ही निकलेंगे।

1500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थान जिनका ढलान उत्तर या पुर्व दिशा मे हो तथा पाला न पड़ता हो अखरोट उत्पादन हेतु उपयुक्त पाये जाते हैं, जिन क्षेत्रो/गावों मै पहले से ही अखरोट के फलदार पौधे हैं इस आधार पर भी अखरोट लगाने हेतु स्थान का चयन किया जा सकता है।

पर्वतीय क्षेत्र के गावों या आस-पास के क्षेत्रो मै कुछ अखरोट के पौधों की प्रसिद्धि उनके फलों की उपज एवं गुणवता के कारण होती है ऐसे उन्नत किस्म के अखरोट के पौधौं का चयन स्थानीय ग्रामीणों की जानकारी के आधार पर करें ।

सितम्बर माह में अखरोट के फल तैयार होने शुरु हो जाते हैं ऊंचाई ढलान एंव हिमालय से दूरी के आधार पर अखरोट के फल तैयार होने का समय कुछ दिन आगे पीछे हो सकता है।

जिस समय अखरोट के बाहर का हरा छिलका फटने लगे समझो फल तैयार हो गया ऐसी अवस्था आने पर चयनित (उन्नत किस्म के अख्ररोट) पौधे से उत्पादित फलों को तोड लें तथा किसी नम स्थान पर रख कर फलों के बाहरी छिलके को हल्की डंडी से पीट कर अलग कर ले तथा गीले बोरे से ढक ले, धूप लगने पर गर्मी व नमी के कारण 5-6 दिनो मै इन अखरोट के दानों मै जमाव होने लगता है ।

पूर्व मै किये गये तैयार गढौ मै प्रत्येक गढे मै एक या दो अँकुरित बीज का रोपण करें।

बड़े रूट ट्रेनर, छेद किये बड़ी पौलीथीन की थैलियों या खाद, सीमेंट के खाली कट्टों मे गोबर की खाद मिली मिट्टी भर कर इनमें अंकुरित बीज की बुआई कर पहले पौध तैयार कर अगले बर्ष भी पौधों का रोपण किया जा सकता है।

खेतों मै गड्ढे अगस्त के अन्तिम सप्ताह या सितम्बर के प्रथम सप्ताह मै बरसात के बाद, 10×8 याने लाइन से लाइन 10 मीटर तथा पौध से पौध की दुरी 8 मीटर पर करें, गड्ढौको सडी गोबर की खाद मिलाकर भर लें।

तैयार गढौ मै अंकुरित बीज लगाने के बाद सिंचाई अवश्य करें तथा थाबलो को सुखी पत्तियों के मल्च से ढक लें जिससे नमी बनी रहे। माह नवम्बर तक अंकुरित पौधे 1 फिट तक के हो जाते है ।
इस विधि से लगाये गये अखरोट के पौधौ मै 7-8 वर्षो के बाद फल आने शुरु हो जाते हैं तथा फल almost true to the type यानी मातृवृक्ष की तरह ही होते हैं।

लेखक उद्यान विशेषज्ञ है।

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