Saturday, March 7, 2026
Home उत्तरकाशी अनंघा फाउंडेशन : लोक के चितेर्रो का विशेष सम्मान।

अनंघा फाउंडेशन : लोक के चितेर्रो का विशेष सम्मान।

Manju tamta
Manju tamta

पिछौड़ी वूमेन से प्रसिद्ध मंजू टम्टा, लोक की चितेरी उप्रेती बहने, लोक संस्कृति कर्मी दारवान नैथवाल को सीमांत जनपद उत्तरकाशी के मंगसीर बगवाल में विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। बता दें कि उत्तरकाशी में अनंघा फाउंडेशन द्वारा आयोजित “मंगसीर बगवाल” अपने आप में ऐतिहासिक आयोजन है। पिछले 20 सालों से मुख्यालय में मनाए जाने वाला यह आयोजन विरासत को संजोए हुए है।

अनंघा फाउंडेशन जिला मुख्यालय में इस आयोजन को लंबे समय से करता आ रहा है।

Mangsir bagwal
Mangsir bagwal

अनघा फाउंडेशन के संस्थापक और विश्वनाथ मंदिर के महंत अजय पुरी ने बताया कि वह एक तरफ जिला मुख्यालय में मौजूद लोगों को एकत्र करने के लिए और उन्हें अपनी विरासत से जोड़ने के लिए मंगसीर बगवाल का आयोजन करती है,

दूसरी तरफ इस आयोजन में ऐसे लोगो को अनंघा फाउंडेशन सम्मानित करती है जो लोक संस्कृति के लिए कार्य कर रहे हो।

उल्लेखनीय हो कि इस वर्ष “मंगसीर बगवाल” में अनंघा फाउडेशन द्वारा पिछौडी वूमन मंजू टम्टा, लोक की चितेरी उप्रेती बहने और लोक संस्कृतिकर्मी दरवान नैथवाल को सम्मानित किया गया है।

कार्यक्रम में गंगोत्री के विधायक सुरेश चौहान सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन रंगकर्मी व शिक्षक राघवेंद्र उनियाल और श्री नौटियाल ने संयुक्त रूप से किया है।

@मंजू टम्टा –
श्रीमती मंजू लंबे समय से पिछौड़ी की पहचान और पिछौड़ी को नए रूप में देश दुनिया में पहुंचाने का काम कर रही है। मंजू टम्टा द्वारा तैयार पोटली व बद्रीश पिछौड़ी को नरेंद्र नगर में हुई जी20 की बैठक में आए हुए मेहमानो को उत्तराखंड सरकार ने सप्रेम भेंट की है। मंजू पिछौड़ी ही नही बल्कि पहाड़ के ने परिधान सहित पहाड़ी ज्वेलरी की परम्परागत डिजयन को बाजार में उपलब्ध करवा रही है।अर्थात अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अब बड़ी आसानी से राज्य का परंपरागत पहनावा और पिछौड़ी, ज्वेलरी अलग पहचान बना चुका है।

@उप्रेती बहने –
<span;>ज्योति उप्रेती सती व डा० नीरजा उप्रेती दोनो बहने लंबे समय से उत्तराखंडी गीत संगीत के संरक्षण और गायन विधा के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रही है। लेखन, गायन, प्रशिक्षण और अध्ययन करके लोक संस्कृति के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक पहलुओं पर लगातार रचनात्मक कार्य कर रही है। दोनो बहनों ने संयुक्त रूप से उत्तराखंडी लोक संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय फलक पर विशेष पहचान दिलवाई है।

@दरवान नैथवाल –
लोक गायक दरवान नैथवाल पिछले 40 वर्षो से लोक गीतो को प्रस्तुत ही नही कर रहे है बल्कि उनका दस्तावेजीकरण भी कर रहे है। उनके संरक्षण के लिए उनके पास एक विशाल आर्काइव है।

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