Thursday, May 14, 2026
Home देहरादून दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'अङ्वाल'  का प्रदर्शन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘अङ्वाल’  का प्रदर्शन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘अङ्वाल’  का प्रदर्शन

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

कुमाऊंनी काव्य यात्रा पर लंदन में रह रहे फ़िल्मकार ललित मोहन जोशी ने अपनी आत्मकथात्मक पर कुमाऊनी भाषा में फ़िल्म ‘अङ्वाल’ बनाई है जिसे दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में प्रदर्शित किया गया है।

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी ने फिल्मकार ललित मोहन जोशी  का परिचय प्रस्तुत किया और सभागार में उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा आम लोगों में बौद्धिक व अकादमिक विमर्श के लिए  समय-समय पर इस तरह के  कार्यक्रमों के प्रयास के आयोजन किये जाते रहे हैं। कार्यक्रम में उत्तराखन्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

उन्होंने ललिलमोहन जोशी को इस कुमाउनी फ़िल्म के निर्माण पर बधाई दी और कहा कि आंचलिक व मातृभाषा में बनी इस तरह की फिल्मों का बनना एक बड़ी बात है। फिल्मकार ललित मोहन जोशी ने  कहा कि पहाड़ के पुराने कवियों के काव्य के माध्यम से  पहाड़ की ज्वलन्त मुद्दों को इस फ़िल्म में समेटने की एक कोशिश की है। जिसका सही मूल्यांकन फ़िल्म के दर्शक ही कर सकते हैं।  इसके बाद फ़िल्म प्रदर्शन का शुभारम्भ किया गया।

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म्कार के रूप में ललित मोहन जोशी की ‘लेखकों की भीड़ से अलग – गौतम सचदेव’  और  ‘बियॉन्ड पार्टीशन’ जैसी फ़िल्में हिंदी साहित्य और हिंदी फिल्मों के कथ्य और सरोकारों की पड़ताल करती हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि अङ्वाल कुमाऊनी कविता के उद्भव, विकास और उसमें अंतर्निहित दर्द की एक  दास्तान है।

वर्ष 2019 में उत्तराखंड की मनोरम पहाड़ियों में फ़िल्मायी गयी अङ्वाल पहाड़ से होने वाले पलायन और वनोन्मूलन की भी काव्यात्मक दास्तान है।

अङ्वाल डोकोमेंट्री फिल्म गुमानी से होती हुई, गौर्दा, श्यामाचरण दत्त पंत, रामदत्त पंत, चारु चंद्र पांडे, त्रिभुवन गिरी, देव सिंह पोखरिया और दिवा भट्ट तक जाती है।

अङ्वाल के जीवंत किरदार, हिमालय की अलौकिकता, बुरांश और काफल जैसे फल-फूल, अल्मोड़ा सरीखे बौद्धिक शहर की खासियत, नौकुचियाताल और भीमताल झील की शांत लहरें और कुमाऊँ के शहरों और पहाड़ियों को जोड़ने वाली खूबसूरत घुमावदार मोटर सड़कें हैं।

अङ्वाल का छायांकन पूना फिल्म संस्थान से प्रशिक्षित रंगोली अग्रवाल ने किया है। इसका संगीत कुमाऊँ के प्रसिद्ध सरोद वादक पं.चंद्र शेखर तिवारी और बांसुरी वादक पं हरीश चंद्र पंत ने दिया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि  लंदन के सांस्कृतिक, साहित्यिक और सिनेमाई मंच पर 1990 के दशक से रेडियो प्रसारक, लेखक, कवि, फ़िल्म इतिहासकार और फ़िल्मकार, ललित मोहन जोशी की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण रही है। ललित मोहन जोशी अपने सांस्कृतिक कार्य व लेखन के लिए भारतीय उच्चायोग, विश्व रंग भोपाल, लमही साहित्यिक पत्रिका और यूके हिन्दी समिति द्वारा सम्मानित किये जा चुके हैं।

फ़िल्म प्रदर्शन के बाद सभागार में उपस्थित फ़िल्म के दर्शकों ने फिल्मकार जोशी से सवाल-जबाब भी किये। इस अवसर पर निकोलस हॉफलैण्ड, विकल्प पांडे, गीता गैरोला, सुंदर सिंह बिष्ट, कमला पन्त, विनोद सकलानी, डॉ.योगेश धस्माना, हिमांशु आहूजा, राकेश कुमार, आदि सहित कई फ़िल्म प्रेमी, साहित्यकार, लेखक व युवा पाठकगण उपस्थित रहे।

RELATED ARTICLES

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

यात्रा संस्मरण : जब यायावर डॉ० अरुण कुकसाल मिले जखोली की डॉ० आशा से।

जीवन के आघातों से जूझकर हासिल की कामयाबी-डा. आशा। Dr. Arun kuksal श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, मयाली से होकर जखोली पहुँचा हूँ। ‘जखोली (समुद्रतल से ऊँचाई लगभग...

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम

फूलचंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में अत्याधुनिक स्टेम लैब का उद्घाटन, विज्ञान एवं नवाचार को मिलेगा नया आयाम। स्पार्क टेक्नोलॉजीज , स्पेक्स एवं...

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन

शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन।   By - Prem Pancholi ।।13 मई, 2026 ,देहरादन।। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भारत के लोक सेवा प्रसारक...

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ की एक और कृति पाठकों के बीच

कथाकार राम प्रकाश अग्रवाल ‘कण’ के कथा संग्रह ‘मां जिसकी गोद में सभ्यताएं पलीं’ का लोकार्पण दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र देहरादून के सभागार...

ट्राइकोग्रामा एक उत्तम प्राकृतिक खेती की तकनीकी। पढ़े पूरी रिपोर्ट

ट्राइकोग्रामा एक सूक्ष्म परजीवी ततैया है जो हानिकारक कीड़ों के अंडों पर हमला करता है। यह लगभग 200 प्रकार के नुकसानदायक कीटों के अंडों...

स्मृति शेष : बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान

बलदेव सिंह आर्य -उत्तराखंड में शिल्पकार पहचान   By - Vinod Arya   सामाजिक न्याय, शिल्पकार चेतना और समानता के महान अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य जी (12 मई...

वरिष्ठ साहित्यकार राम प्रकाश अग्रवाल कण की पुस्तक का लोकार्पण।

पुस्तक लोकार्पण "मॉं जिसके गोद में सभ्यताएं पलीं" लेखक - राम प्रकाश अग्रवाल कण, प्रकाशन - समय साक्ष्य (देहरादून)   By - Neeraj Naithani ।।   लैंसडाउन चौक स्थित...

तुलसी माला को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं बद्रीनाथवासी? पढ़े पूरी रिपोर्ट

By - Sanjana bhagwat   बद्रीनाथ धाम में तुलसी माला को लेकर बामणी गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध केवल एक व्यापारिक विषय नहीं,...

12 मई विशेषांक : शिल्पकारों के उत्थान के लिए लड़ते रहे बलदेव सिंह आर्य।

‘जातीय जड़ता जाने का जश्न मनायें’। उत्तराखण्ड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992)...

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह : उफ्तारा

अक्टूबर में होगा फिल्म पुरुस्कार समारोह। फिल्म परिषद का कार्यालय शीघ्र। सी.ई.ओ. बंशीधर तिवारी का उफतारा ने जताया आभार। दूरदर्शन और संस्कृति विभाग को...