Saturday, March 7, 2026
Home देहरादून दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'अङ्वाल'  का प्रदर्शन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘अङ्वाल’  का प्रदर्शन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘अङ्वाल’  का प्रदर्शन

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

कुमाऊंनी काव्य यात्रा पर लंदन में रह रहे फ़िल्मकार ललित मोहन जोशी ने अपनी आत्मकथात्मक पर कुमाऊनी भाषा में फ़िल्म ‘अङ्वाल’ बनाई है जिसे दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में प्रदर्शित किया गया है।

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी ने फिल्मकार ललित मोहन जोशी  का परिचय प्रस्तुत किया और सभागार में उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा आम लोगों में बौद्धिक व अकादमिक विमर्श के लिए  समय-समय पर इस तरह के  कार्यक्रमों के प्रयास के आयोजन किये जाते रहे हैं। कार्यक्रम में उत्तराखन्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

उन्होंने ललिलमोहन जोशी को इस कुमाउनी फ़िल्म के निर्माण पर बधाई दी और कहा कि आंचलिक व मातृभाषा में बनी इस तरह की फिल्मों का बनना एक बड़ी बात है। फिल्मकार ललित मोहन जोशी ने  कहा कि पहाड़ के पुराने कवियों के काव्य के माध्यम से  पहाड़ की ज्वलन्त मुद्दों को इस फ़िल्म में समेटने की एक कोशिश की है। जिसका सही मूल्यांकन फ़िल्म के दर्शक ही कर सकते हैं।  इसके बाद फ़िल्म प्रदर्शन का शुभारम्भ किया गया।

Angwal docomentri film
Angwal docomentri film

एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म्कार के रूप में ललित मोहन जोशी की ‘लेखकों की भीड़ से अलग – गौतम सचदेव’  और  ‘बियॉन्ड पार्टीशन’ जैसी फ़िल्में हिंदी साहित्य और हिंदी फिल्मों के कथ्य और सरोकारों की पड़ताल करती हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि अङ्वाल कुमाऊनी कविता के उद्भव, विकास और उसमें अंतर्निहित दर्द की एक  दास्तान है।

वर्ष 2019 में उत्तराखंड की मनोरम पहाड़ियों में फ़िल्मायी गयी अङ्वाल पहाड़ से होने वाले पलायन और वनोन्मूलन की भी काव्यात्मक दास्तान है।

अङ्वाल डोकोमेंट्री फिल्म गुमानी से होती हुई, गौर्दा, श्यामाचरण दत्त पंत, रामदत्त पंत, चारु चंद्र पांडे, त्रिभुवन गिरी, देव सिंह पोखरिया और दिवा भट्ट तक जाती है।

अङ्वाल के जीवंत किरदार, हिमालय की अलौकिकता, बुरांश और काफल जैसे फल-फूल, अल्मोड़ा सरीखे बौद्धिक शहर की खासियत, नौकुचियाताल और भीमताल झील की शांत लहरें और कुमाऊँ के शहरों और पहाड़ियों को जोड़ने वाली खूबसूरत घुमावदार मोटर सड़कें हैं।

अङ्वाल का छायांकन पूना फिल्म संस्थान से प्रशिक्षित रंगोली अग्रवाल ने किया है। इसका संगीत कुमाऊँ के प्रसिद्ध सरोद वादक पं.चंद्र शेखर तिवारी और बांसुरी वादक पं हरीश चंद्र पंत ने दिया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि  लंदन के सांस्कृतिक, साहित्यिक और सिनेमाई मंच पर 1990 के दशक से रेडियो प्रसारक, लेखक, कवि, फ़िल्म इतिहासकार और फ़िल्मकार, ललित मोहन जोशी की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण रही है। ललित मोहन जोशी अपने सांस्कृतिक कार्य व लेखन के लिए भारतीय उच्चायोग, विश्व रंग भोपाल, लमही साहित्यिक पत्रिका और यूके हिन्दी समिति द्वारा सम्मानित किये जा चुके हैं।

फ़िल्म प्रदर्शन के बाद सभागार में उपस्थित फ़िल्म के दर्शकों ने फिल्मकार जोशी से सवाल-जबाब भी किये। इस अवसर पर निकोलस हॉफलैण्ड, विकल्प पांडे, गीता गैरोला, सुंदर सिंह बिष्ट, कमला पन्त, विनोद सकलानी, डॉ.योगेश धस्माना, हिमांशु आहूजा, राकेश कुमार, आदि सहित कई फ़िल्म प्रेमी, साहित्यकार, लेखक व युवा पाठकगण उपस्थित रहे।

RELATED ARTICLES

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...