Sunday, June 28, 2026
Home उत्तराखंड दे दी तुम्हें आजादी, बिना शर्म, बिना मलाल

दे दी तुम्हें आजादी, बिना शर्म, बिना मलाल

दे दी तुम्हें आजादी, बिना शर्म, बिना मलाल

By – U. Bhaskar

कल मैं जाटों का दुःख सुन रहा था. किसान आंदोलन के बाद से वहाँ बहस चल रही है कि मौजूदा सरकार ने हर तरह से उनके खिलाफ कदम उठाए- किसान आंदोलन कुचलने की कोशिश, महिला रेसलर्स का साथ न देकर गुंडे का साथ देना, जाट पार्टियों के अंदर तोड़ फोड़ और बाद में सत्यपाल मलिक और जयदीप धनखड़ का मामला. ऐसा कैसे हुआ? मेरठ बागपत से चलने वाली आरएसएस की शाखाएं, जहाँ उनके दिमागों में मुस्लिमों और दलितों के प्रति खास रसायन बन चुका था.

इस पर आज वहाँ गाँव गाँव पंचायतें हो रही हैं कि कभी न हारने वाले जाट किसान इतने पंगु हुए कैसे? यह भी कहा जा रहा है कि जाट रेजीमेंट के पूर्व सैनिक भी क्यों हिन्दू-मुस्लिम के बहकावे में आ गए? बहुत सारे जाटों ने विकास के चक्कर में अपनी ज़मीनें भी खो दी हैं. नई पीढ़ी ट्रैक्टर पर हाथ नहीं लगा रही, बल्कि उनके अंदर कॉर्पोरेट फार्मिंग का बीज बोया जा रहा. युवा शराब और रील में मस्त हैं.

जाट लैंड के अलावा, मराठी भी आजकल आहत हैं. जब से उनके एमएलए गोहाटी पहुंचे और बाद में निर्लज्ज रूप से बिके नजर आए. फिर, बाल ठाकरे की पार्टी का जो हश्र किया. यहाँ तक कि मुंबई से उद्योग गुजरात शिफ्ट किए जाने लगे. मराठी मानुष आहत है.

उत्तराखंड में भी जब हम बड़े हो रहे थे, अस्मिता और स्वाभिमान की बात हो रही थी. 1994 के साल में स्वाभिमान की बात बहुत तेज हो गई, दमन भी खूब हुआ और फिर प्रतिकार भी. पहली बार कुमाऊँ और गढ़वाल एक प्राण होकर लड़े. सीमान्त समाज, जौनसार की पट्टीयां और दलित समुदाय उत्तराखंड आंदोलन को तटस्थ्ता से जरूर देख रहा था लेकिन बड़ा वर्ग आंदोलन में कूद गया था. सौष्ठव के लिए विशाल पूर्व सैनिक संगठन भी. लेकिन, 98 आते-आते चाल बदल गई. पहाड़ी पार्टी UKD पर भी ठीकरा फोड़ा जाता है. कुछ दोष वाम और आंदोलनकारी शक्तियों को दिया जाता है.

मुड़कर देखें तो अंतिम प्रदर्शनों और आंदोलनों का रुख बदलने लगा. शांतिपूर्ण आंदोलन यकायक हिंसक होने लगे. मुलायम सिंह के प्रति घृणा फैलाई जाने लगी, उन्हें मुल्ला मुलायम कहा जाने लगा. देशी – पहाड़ी होने लगा. हरिद्वार और उधमसिंह नगर के लोगों को भी काम में लगा दिया किसी ने. कौन थे ये लोग? आज उन उग्र लोगों में से कई विधान सभा में हैं. उन्होंने जनता के बीच के उबाल को अपने हित में कर लिया. एक मिसाल विधायक/ मंत्री गणेश जोशी की, वह महिला मंच के जुलूस के आगे आकर पुलिस के सामने लोट पोट करने लगता. पहले से तैनात फोटोग्राफर क्लिक करता. अगले दिन अख़बार में- गणेश जोशी पर बर्बर लाठीचार्ज. एक दूसरा उदाहरण राम सिंह कैड़ा का, जो बहुत जल्द सत्ता की करवट भाँप गए.

अंततः उत्तराँचल राज्य अवतरित हुआ. और अनचाही राजधानी देहरादून. बैलेंसिंग एक्ट के तहत नैनीताल को हाई कोर्ट दिया गया.
2011 की जनगणना में यह स्पष्ट हो गया कि हम किधर जा रहे, जब पौड़ी और अल्मोड़ा की जनसंख्या वृद्धि दर निगेटिव आई. 2021 में जनगणना हुई नहीं, अब जो भी सामने आएगी उसमें सभी पर्वतीय जिलों की ग्रोथ नेगटिव होगी शर्तिया. देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल (मैदानी क्षेत्र), पौड़ी (मैदानी क्षेत्र) और उधमसिंह नगर की ओवरग्रोथ दिखेगी, यानी वो भी रहने लायक नहीं बचेंगे.

पहाड़ों का तेजी से देवभूमिकरण होने लगा. आदिम भगवानों को मुख्यधारा में लाया गया. हर जगह क्षत्रिय सभा और ब्राह्मण सभा बनने लगीं. एक बढ़िया खेल हुआ, जब पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को बाहरी बताकर गद्दी से हटाया गया. किसने हटाया, जिसने पहले बिठाया था. दूसरा बढ़िया खेल हुआ, “मुख्यमंत्री हमारा, पार्टी अध्यक्ष तुम्हारा” फार्मूला. समझ रहे होंगे?

नेताओं की नई पीढ़ी तैयार हो गई. पुरखों के झंडे उठाने वाले अब तक पहाड़ और भाबर में प्रॉपर्टी के धंधों, शराब और खनन की कमाई से फूल गए थे. पार्षद और प्रधानी से आगे बढ़कर वे बड़ी भूमिका में आ गए. अब उनके हाथ में राज्य है. राजनीति का अब पूरी तरह से हरकीकरण और काऊकरण हो चुका. तराई में उमेशीकरण और चैंपियनीकरण.

आगे की पीढ़ी के सामने राह स्पष्ट है. कोई कन्फूज़न नहीं. आगामी नेताओं में सभी शाखामृग हैं. वो भी शॉर्ट कोर्स वाले, जिसमें शर्म – लिहाज वाला पाठ है ही नहीं.
देवभूमि का पूरी तरह से काँवड़ीकरण हो चुका.

RELATED ARTICLES

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...