पिछले एक महीने के दौरान भीषण आपदाओं के बीच फंसे होने, सब कुछ अस्त व्यस्त होने के बीच उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य जैसे अधिकारी उम्मीद देते हैं, उनके लिए तारीफ बनती है। वह कर तो वही रहे हैं जो उनकी ड्यूटी है लेकिन शायद बहुत समय से हमें ऐसे अफसर देखने की आदत नहीं रही थी जो काम को लेकर इस तरह से समर्पित रहा हो।
प्रशांत आर्य पूर्व में उत्तरकाशी में मुख्य विकास अधिकारी रहे हैं, बतौर जिलाधिकारी यह उनकी पहली पोस्टिंग है, उत्तरकाशी पहुंचते ही भारी बारिश के बीच पंचायत चुनाव करवाने की जिम्मेदारी थी वह बखूबी निभाई, कुछ मौसम ने साथ दिया कुछ बतौर जिला निर्वाचन अधिकारी उन्हें करना चाहिए था वह उन्होंने किया और सब कुछ बेहतर ढंग से निपट गया। लेकिन, उनकी असल परीक्षा 5 अगस्त की दोपहर से शुरू हुई जब दोपहर को अचानक धराली एक सैलाब में दब गया। सैलाब में धराली गांव कस्बा दब गया लेकिन इसका असर पूरी भागीरथी घाटी पर पड़ा।
भारी बारिश, भागीरथी नदी में उफान से सड़के ध्वस्त हो गई, बिजली, दूर संचार जैसी बुनियादी जरूरतें ठप पड़ गई। धराली में आई आपदा का स्वरूप इतना खतरनाक था कि अगले कई हफ्तों तक पूरी भागीरथी घाटी पर वाटर बम का खतरा मंडरा रहा था, हाईवे बंद था, मौसम साथ नहीं दे रहा था लेकिन पूरा जिला प्रशासन चौबीसों घंटे काम पर जुटा था, खुद सूबे के मुख्यमंत्री ग्राउंड जीरों पर उतरकर राहत बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे, जिस तेजी से राहत बचाव सुरक्षा कार्य चल रहे थे बतौर गवाह दावे के साथ कह सकता हूं कि उस दौरान जिलाधिकारी समेत प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी, मजदूर, पुलिस शायद ही किसी को घंटे दो घंटे की नींद नसीब हो रही थी होगी। भीषण आपदा के अगले चौबीस घंटों से भी कम समय में आधी से अधिक भागीरथी घाटी में बिजली, दूरसंचार व्यवस्थाएं बहाल हो गई थी, सड़कों को खोलने का काम जारी था। चौबीसों घंटे चल रहे राहत, बचाव कार्यों की तस्वीरों, में मुख्यमंत्री के लौटने के बाद भी एक चेहरा लगातार दिन रात मौजूद दिख रहा था जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य।
भागीरथी घाटी में बेपटरी हो चुकी जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद चल रही थी तो धरासू में गंगोत्री हाईवे भी धोखा दे रहा था, वहां सोशल मीडिया पर तेजी से पोस्ट होती तस्वीरों में एक चेहरा कॉमन था वह जिलाधिकारी प्रशांत आर्य। इसी बीच स्यानाचट्टी में यमुना का प्रवाह रूक गया तो एक कृत्रिम झील बन गई। झील एक वाटर बम में तो तब्दील हो रही थी साथ ही यात्रा सीजन में जिंदा रहने वाले स्यानाचट्टी को भी पानी लील रहा था, लेकिन अगले दो दिनों में सुखद खबर आती है कि झील का पानी निकलने लगा है और यह वाटर बम डिस्पोज किया जा चुका था।
उत्तरकाशी में पिछले डेढ़ दशक में भीषण आपदाएं देखी, प्रशासन सरकार का नकारापन देखा, प्रभावितों का गुस्सा भी देखा, बतौर पत्रकार हमें खुद सड़कों पर उतरना पड़ा था। लेकिन, धराली से लेकर यमुनोत्री स्यानाचट्टी तक आई आफत में इस बार चीजों को तेजी से चलते देखा, मुख्यमंत्री को पहली बार ग्राउंड जीरों पर व्यवस्थाओं की निगरानी करते हुए देखा, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को हर वक्त हर आपदा प्रभावित हिस्से में मौजूद देखा।
मैंने इस दौरान सोशल मीडिया पर पोस्ट होती तस्वीरों को देखा मुझे लगता है कि डीएम प्रशांत आर्य को बमुश्किल ही अपने कपड़े बदलने का मौका मिला होगा और शायद ही पिछले तीन चार हफ्तों में उन्हें घंटे दो घंटे की नींद नसीब हुई होगी। ऐसे अधिकारी राज्य की संपत्ति होते हैं, इनका अनुभव, इनका समर्पण, इनकी संवेदनशीलता, इनकी करूणा आपदा के लिहाज से संवेदनशील इस राज्य के पहली पंक्ति के अफसरों का जरूरी तत्व होता है।
मेरी प्रशांत आर्य जी से कोई मुलाकात नहीं हुई है कुछेक बार आमने सामने किसी कार्यक्रम के।
यही उम्मीद है कि राज्य गठन के बाद अफसरों के रूप में पहली दूसरी खेप के यह संवेदनशील अफसर इस राज्य के लिए उम्मीदों का खुला आसमान से लगते हैं।
चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना
तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...
चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना
तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...
डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...
Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas
By - Prem Pancholi
The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...
जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....
गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया
मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...