Sunday, September 13, 2026
Home साहित्य कवयित्री सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रही है।

कवयित्री सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रही है।

कवयित्री सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रही है।

@Rajkumar Panwar

Kahe-Ankehe Rang Jeevan Ke: Poems from the series of quotes from the heart
Kahe-Ankehe Rang Jeevan Ke: Poems from the series of quotes from the heart

कहे–अनकहे रंग जीवन के :–

जीवन क्या है ?
एक जलता दिया।
जिसने जैसा समझा,
वैसा ही जिया………
वास्तव में बहुत से कहे–अनकहे रंग हैं इस जीवन के पर बात इतनी–सी है कि जीवन एक जलता दिया है। तेल खत्म, खेल खत्म। इसलिए जब तक इसमें तेल है बुद्ध पुरुषों की भांति इस जलती हुई ज्योति का सदुपयोग करो और इसे जगत को रोशन करने में लगा दो।
“कहे–अनकहे रंग जीवन के” बहिन भारती आनंद का हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह है। जिसकी शुरुआत वे “प्रार्थना” से करती हैं। ईश्वर के प्रति उनका प्रेम भाव इस बात की सूचना देता है कि हमें किसी भी काम को करने से पहले हमेशा ईश्वर को याद करना चाहिए। ईश्वर का हमेशा ध्यान रखने वाला व्यक्ति कभी गलत काम नहीं करेगा, उसका जीवन हमेशा परहित में लगा रहता है, उसकी वाणी से सौम्यता झलकती है, ईश्वर की प्रार्थना से ही व्यक्ति का आचरण सरल और सहज बनता है।
स्त्री:–
स्त्री अधिक प्रेम पूर्ण होती है क्योंकि वह तर्क से नहीं बल्कि शुद्ध भावना और हृदय से जीती है। उसके लिए प्रेम मुक्ति है। जो पुरुष के लिए जहर है वह स्त्री के लिए अमृत है। उसका कोई धर्म, तीर्थंकर, अवतार अब तक पृथ्वी पर पैदा नहीं हुआ इसलिए उसके हृदय की बात को किसी ने अब तक प्रगट नहीं किया, परंतु कवयित्री ने यहां पर स्त्री की पीड़ा, वेदना को समझा है और उसके प्रति अपने गहरे भाव प्रगट किए हैं।
दान :–
आजकल हर कोई दान कर रहा है।
पुण्य का यह काम खुलेआम कर रहा है।
कहीं पीछे ना रह जाएं हम इस भीड़ में,
अपनी महानता का गुणगान कर रहा है।
यहां पर कवयित्री उन लोगों की बात कर रही है जो आजकल दान–पुण्य कम और सोशल मीडिया पर ढिंढोरा ज्यादा पीट रहे हैं। खैर इसका दूसरा सकारात्मक पहलू यह है कि सोशल मीडिया के इस दौर में लोग फोटो खींचने के बहाने कम–से–कम दान तो कर रहे हैं। इसी बहाने दो चार गरीब लोगों तक उनके राशन के थैले और कंबल तो पहुंच रहे हैं।
मीठे बोल:–
जीवन चार दिन का मेला है। दुनिया में आना-जाना यही मनुष्य की रीत है। मीठा बोलना ही प्रेम है। मनुष्य यहां पर मेरा–तेरा में ही उलझा रहता है जबकि यहां से कुछ भी साथ नहीं जाएगा। सिकंदर जैसे व्यक्ति भी खाली हाथ चले गए। जिसके हृदय में नफरत पलती है उसका गंगा नहाने से कुछ न होगा। स्वयं गंगा पुत्र भीष्म भी पापों से मुक्त न हो सका तो जिनके हृदय नफरत से भरे हैं उनका मुक्त होना असंभव है। इसलिए हृदय में प्रेम की ज्योति जलाओ, प्रेम ही परमात्मा है।
बेटी हूं तेरी :–
न कहो उसे देवी बस उसे जीने का अधिकार दो। आज हर तरफ भ्रूण हत्या हो रही है, बेटी को जगत में आने से पहले ही मार दिया जा रहा है। कवयित्री इस बात को लेकर चिंतित है और समाज से वह बेटी–बेटे के इस फर्क को खत्म करना चाहती है। उसके भीतर भाव उठ रहे हैं कि बेटी से ही रिश्तों की पहचान है, बेटी नहीं रहेगी तो एक दिन यह दुनिया खत्म हो जाएगी। अकेले पुरुष सृष्टि का निर्माण नहीं कर सकता है और न अकेले पुरुष ने इतनी बड़ी सृष्टि का निर्माण किया है।
कितने सभ्य:–
यहां पर कवयित्री प्लास्टिक कचरे से बहुत परेशान दिख रही है। और हो भी क्यों न आज हमने अपनी आदत में हर जगह प्लास्टिक जो शुमार कर लिया है। हम जितने सभ्य होते जा रहे हैं उससे कहीं ज्यादा असभ्य हो गए हैं। चिप्स के पैकेट, बिसलरी की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक आदि सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे के कारण आज पृथ्वी खतरे में है।
उम्र:—
आज आदमी के पास इतना सोचने तक का वक्त नहीं है कि मैं क्यों और किस लिए व्यर्थ की दौड़ में लगा हूं। आज पूरी दुनिया एक पागलखाना हो गई, यहां दौड़ है, महत्वकांक्षा है, प्रतिस्पर्धा है, भिखारी के मन में भी सम्राट होने की आकांक्षा है। मनुष्य अपना पूरा जीवन व्यर्थ की दौड़ आपाधापी में ही गंवा बैठता है। मरते वक्त वह यही सोचता है कि जीवन मेरे पास था और मैंने जिया नहीं, बस उम्र यूं ही गुजार दी आपाधापी में।
कोविड-19 एक महामारी:—
महामारी का अर्थ होता है जहां बचने का कोई उपाय न रहा, जहां कोई औषधि काम न आएगी, जहां हमारे सारे उपाय टूट जाएं और मृत्यु ही अंततः जीते। जब लोग कुत्ते की मौत मर रहे थे, मृत्यु का तांडव नृत्य हो रहा था, क़ब्रिस्तान कम पड़ रहे थे, मृत्यु का इतना विकराल रूप लोगों ने न कभी देखा न कभी सुना था, सब उपाय किए गए परंतु सारे हारे। एक अदना से वायरस ने सारी दुनिया को हिला कर रख दिया। लोगों के भीतर एक काल्पनिक डर पैदा हो गया तो लोग मानसिक संतुलन खोने लगे और बेचैन होकर मरने लगे। मनुष्य अपने ही जाल में फंस गया, काला बादल बनकर मौत उसके ऊपर मंडराने लगी, ध्यान रहे डर से खतरनाक कोई वायरस नहीं होता है यह मनुष्य से वह सब करवाता है जो वह नहीं करना चाहता। लोगों ने खूब ताली, थाली क्या–क्या नहीं किया। इस यमदूत का चारों ओर ऐसा माहौल बना कि लोगों को खुद से ही डर लगने लगा था, घर का व्यक्ति भी शत्रु लगने लगा अपने ही पराया हो गए थे।
मैं कौन ? :–
यहां पर कवयित्री ने स्त्री के अस्तित्व की गहरी पीड़ा व्यक्त की है। स्त्री को कहीं पर भी अपना कुछ भी नजर नहीं आ रहा, जबकि उससे घर पूरा होता है पर उसका कोई घर नहीं। मां बचपन से ही उसे ताने मारती है कि बेटी तुझे ठीक से कामकाज में ध्यान देना चाहिए क्योंकि तू पराया धन है, यहां तो तेरा बस चंद दिनों का बसेरा है, ससुराल ही असली घर है तेरा, इस घर से विदा होगी तेरी डोली पर ससुराल से अर्थी में तुझे जाना है। फिर एक दिन जब उसकी विदाई होती है तो कल तक जो अपने थे वह एकदम पराए हो जाते हैं और पराए अपने, उसका पूरा संसार ही बदल जाता है। नएं घर में अपना अस्तित्व खोजने में उसे कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, उसे क्या–क्या सहना पड़ता है इस पीड़ा को एक स्त्री की आत्मा ही जान सकती है।
पहाड़:—
पहाड़ की हर बात निराली है, यहां का जीवन जीना कठिन है परंतु यही कठिनाइयां यहां के लोगों को स्वस्थ बनाती हैं। आलू का थिचवाणी, कंडाली का साग, फाफरे की रोटी, आमल की चटनी भोजन नहीं बल्कि एक औषधि है। कंडाली आयरन से भरपूर है तभी यहां के लोग लोहे की भांति सख्त मजबूत हैं। जहां शहर के लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गोलियां खा रहे हैं, बूस्टर ले रहे हैं वहीं आमल (लेहवेरी) की चटनी खाने से पहाड़ के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता शहर के लोगों से कई गुना बेहतर है। प्रकृति ने पहाड़ों को इतना कुछ दिया है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं, शहर की केमिकल युक्त सब्जियों से लाख गुना पहाड़ का ऑर्गेनिक आलू का थिचवाणी है। शहर की चकाचौंध में आज असली खो गया सब नकली हो गया, गाय, भैंस शहर में केमिकल खा रहे हैं जिसको 5 किलो दूध देना था वह 20 किलो दे रही है जिसमें कुछ भी स्वाद नहीं, पहाड़ के दूध में जड़ी बूटियों की मिठास है, दूध भी यहां औषधि का काम करता है। यहां की हर चीज में औषधीय गुण हैं। यहां सांस लेना भी औषधि है, शहर में तो आज सांस लेना भी मुश्किल हो गया, कोलकाता जैसे शहर में 1 दिन में आदमी के फेफड़ों में चार बीड़ी बंडल के बराबर धुआं चला जाता है, बीड़ी में उतना जहर नहीं है जितना उस धुएं में है, शहर की हवाएं विषाक्त हो गई भविष्य में मुंह पर ऑक्सीजन मास्क बांध कर चलना पड़ेगा, उसे भी अमीर व्यक्ति ही खरीद सकेगा, आने वाले समय में गरीब का तो भगवान ही मालिक है।
कठिनाई :–
यहां कवयित्री सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रही है। परिस्थिति जो भी रहे परंतु सोच हमेशा सकारात्मक ही रखनी चाहिए।
उदाहरण— एक बार एक व्यक्ति का नया मकान बनते ही गिर गया तो उसने पूरे गांव में लड्डू बांटे। इस सकारात्मक सोच के साथ कि कल मैं नएं मकान में गृह प्रवेश करने जा रहा था, धन्यभाग मेरे मकान आज गिर गया, कल गिरता तो मेरा पूरा परिवार वहीं दबकर मर जाता। उसने भगवान को दोष नहीं दिया बल्कि शुक्रिया अदा किया। सकारात्मक सोच के साथ चीजों को ऐसे भी देखा जा सकता है।
आधी आजादी:–
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव यदि हंसते–हंसते फांसी पर चढ़ते हैं तो इस ख़याल के साथ कि मुल्क को बचाना जरूरी था, उनकी कुर्बानी लोगों के हित में थी। इसलिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव सूली पर चढ़ते वक्त दुखी नहीं आनंदित हैं, उन्होंने जो चाहा था उसे उस सीमा तक किया जहां अपने को ही मिटा डाला। परंतु आज जब उनकी आत्मा कहीं से देखती होगी तो सोचती होगी कि ऐसी आजादी हमने कब मांगी थी जहां हर जगह भ्रष्टाचार और बेईमानी है….…….…
अंत में मैं बहिन भारती आनंद को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। आपने अपनी लेखनी से सरल और सहज शब्दों में भाव विभोर कर देने वाली सुंदर रचना गढ़ी है।

@लेखक उत्तराखण्ड पुलिस में सेवारत है।

RELATED ARTICLES

स्मृति शेष : बहुआयामी- गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’

बहुआयामी- गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ By - Arun kuksal 'गिर्दा’ की पूरी जीवन कहानी यायावरी की है। हवलबाग के पास कोसी नदी के करीब ज्योली गांव में...

नेगी दा जन्मदिवस : और उनके गीतों का जीवंत सार

नरेन्द्र सिंह नेगी की गीत यात्रा का सार। (नेगी दा के जन्मदिन पर उनकी गीत यात्रा पर एक नज़र)   By - Indresh maikhuri नरेन्द्र सिंह नेगी उत्तराखंड...

सेवानिवृत्ति के बाद की ‘डिजिटल समाजसेवा’ कितना कारगर।

सेवानिवृत्ति के बाद की ‘डिजिटल समाजसेवा’ कितना कारगर। By - Dinesh Verma यहां मै अपने जौनसार-बावर क्षेत्र की जमीनी यथार्थ को समझने को कोशिश कर रहा...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...