Sunday, June 28, 2026
Home देहरादून साहित्य विवाद : उत्तराखंड भाषा संस्थान ने साहित्यकार को नहीं नृत्यकार को...

साहित्य विवाद : उत्तराखंड भाषा संस्थान ने साहित्यकार को नहीं नृत्यकार को दे डाला पुरस्कार

साहित्य विवाद : उत्तराखंड भाषा संस्थान ने साहित्यकार को नहीं नृत्यकार को दे डाला पुरस्कार


उत्तराखंड भाषा संस्थान का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक परते खुलती जा रही है। अर्थात एक और कारनामे पर सवाल उठने लग गए।

मामला इसी दौरान का है। एक साहित्यकार को तीसरी बार इस साहित्य सम्मान से नवाजा गया है। इस तरह उत्तराखंड भाषा संस्थान की पोल की ढोल एक एक कर के खुलने लग गई है।

ज्ञात हो कि तीसरी बार पुरस्कार झटकने वाल शख्स इतना महत्वाकांक्षी है कि होली मिलन कार्यक्रम के बहाने खुद का नागरिक अभिनंदन करवाने में पीछे नहीं रहा, इसलिए कि उन्हें तीसरी बार साहित्य सम्मान मिला है। कुछ नामी साहित्यकारों को आमंत्रित करके और उन्हीं से अपना नागरिक अभिनंदन करवा दिया। फिर क्या, रातभर उस रेस्टोरेंट में जश्न मनाया गया।

आम तौर पर यदि देखा जाए तो कोई भी साहित्यकार इतना हलका नहीं होता कि बार बार एक ही पुरस्कार के लिए फार्म भरे। यह बात इसलिए कही जा रही है कि सरकारी कार्य कागजी रूप से पारदर्शी होते है। चूंकि साहित्य का यह पुरस्कार सरकारी है।

उल्लेखनीय यह है कि जो छिछेलीदारी उत्तराखंड भाषा संस्थान की इस वर्ष के साहित्य सम्मेलन से हुई, शायद कभी हुई होगी। बार बार यही सवाल उठाया जा रहा है कि कुछ साहित्यकार इस पुरस्कार लेने के हकदार नहीं थे। यहां तक कि जिस शख्स को तीसरी बार यह पुरस्कार मिला है वह भी नहीं था। लिहाजा वह व्यक्ति उत्तराखंड सिनेमा में मामूली नृत्य व अभिनय करने वाला व्यक्ति है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि तीसरी बार पुरस्कार पाने वाला व्यक्ति साहित्यकार है ही नहीं, उनके पास जो भी साहित्य से संबंधित दस्तावेज है वह मौलिक नहीं है, बल्कि वे सभी संग्रहित सामग्रियां है। जिसे कोई भी सामान्य नागरिक एकत्रित कर सकता है।

उत्तराखंड भाषा संस्थान पर कुछ लोग सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से अब जानकारी चाहने वाले है कि इस पूरे इवेंट में कितना खर्चा आया है। यदि इस सम्मान देने में सभी समुदायों को साधा गया तो अनुसूचित जाति के समुदाय को क्यों वंचित रखा गया। एक ही व्यक्ति को तीसरी बार क्यों यह सम्मान दिया गया, उस शख्स ने ऐसा क्या विशेष किया है। चयन समिति का गठन कैसे और किस आधार पर हुआ है।

कुलमिलाकर विवादों से घिरा उत्तराखंड भाषा संस्थान के सामने भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न होने वाली है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक व्यक्ति को तीसरी बार इस सम्मान के लिए क्यों चुना गया है। इसके अलावा कुछ और साहित्यकार हैं जिनकी रचनाएं अभी फिलहाल बाल्यावस्था में है उन्हें भी इस साल के पुरस्कार से नवाजा गया है। पर जो साहित्यकार आंचलिक और अन्य साहित्य में खप गए हैं उन्हें इस श्रेणी में क्यों नहीं लाया गया। जबकि उन्होंने इस पुरस्कार के लिए आवेदन भी किया था। यही बड़ा गड़मड़झाला सामने आ रहा है।

इस वर्ष पुरस्कार पाने वाले व्यक्तित्व –

समारोह में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से सुभाष पंत को सम्मानित किया। वहीं, सुमित्रानंदन पंत पुरस्कार से डॉ. दिनेश पाठक, गुमानी पंत पुरस्कार से गोपाल दत्त भट्ट, भजन सिंह पुरस्कार से कुलानन्द घनशाला, गोविंद चातक पुरस्कार से सुनीता चौहान, प्रो. उन्वान चिश्ती पुरस्कार से सगीर उल्लाह, गौरा पंत ‘शिवानी’ पुरस्कार से शमा खान, मंगलेश डबराल पुरस्कार से सतीश डिमरी, महादेवी वर्मा पुरस्कार से शशिभूषण बड़ोनी, शैलेश मटियानी पुरस्कार से ललित मोहन रयाल को सम्मानित किया। जबकि डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल पुरस्कार से नीरज कुमार नैथानी, बहादुर बोरा बंधु पुरस्कार से महेंद्र ठुकराठी, शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़‘ पुरस्कार से मोहन चंद्र जोशी, भवानीदत्त थपलियाल सती पुरस्कार से वीरेंद्र पंवार, कन्हैयालाल डंडरियाल पुरस्कार से मदन मोहन डुकलान, गिरीश तिवारी ‘‘गिर्दा‘‘ पुरस्कार से डॉ. पवनेश ठकुराठी, विद्यासागर नौटियाल पुरस्कार से अनूप सिंह रावत, एवं भैरत दत्त धूलिया पुरस्कार से एमआर ध्यानी को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...