राज्य जब अपनी स्थापना की रजत जयंती मना चुका है तो ऐसे में राज्य के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले, सड़कों पर उतरकर राज्य निर्माण के संघर्ष करने वाले राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान तो बनता है। राज्य स्थापना दिवस पर राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाली पेंशन में बढ़ोत्तरी कर दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रज्य में ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने हैं जिनके कार्यकाल में आंदोलनकारियों की पेंशन में दो बार बढ़ोत्तरी की गई है। उत्तराखंड राज्य के निर्माण की कहानी देश की आजादी के बाद से शुरू होती है और एक लंबे संघर्ष, त्याग बलिदान के बाद 9 नवंबर 2000 को इस राज्य का निर्माण हुआ। सीमित संसाधनों, विषम भौगोलिक परिस्थितियों, अधिकांश क्षेत्र का पर्वतीय होने के बावजूद इस राज्य ने 25 सालों में साबित किया है इसका निर्माण होना कितना जरूरी है, गांव के गांव सड़क से जुड़े हैं, शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों तक हर आदमी की पहुंच बनी है। कुछ अपवाद होते हैं लेकिन जिस तरह का विकास राज्य ने पाया है वह भी काबिल ए तारीफ है। राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान तो बनता है। अर्थात अब मुख्यमंत्री धामी ने आंदोलनकारियों को मिलने वाली राशि में दो बार बढ़ोत्तरी कर उसे सम्मानजनक बनाया है।
राज्य आंदोलन के दौरान सात दिन जेल गए अथवा आंदोलन के दौरान घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन 6हजार से बढ़ाकर 7 हजार कर दी गई है। इसी प्रकार, जेल गए या घायल श्रेणी से भिन्न अन्य राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन 4500 से बढ़ाकर 5500 प्रतिमाह कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य आंदोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त हुए आंदोलनकारियों की विशेष पेंशन 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार प्रतिमाह कर दी गई है। वहीं, राज्य आंदोलन में शहीद हुए आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन 3000 से बढ़ाकर 5500 प्रतिमाह कर दी गई है।
इसके अलावा राज्य में आंदोलनकारियों को और कभी कई तरह की सुविधाएं मिल रही है, हाल ही में पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी गेस्ट में राज्य आंदोलनकारियों को ठहरने की सुविधाओं का भी आदेश जारी किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन पांच सालों के कार्यकाल में समाज के हर वर्ग, हर समुदाय, हर क्षेत्र के हिस्से सरकारी जन कल्याणकारी योजनाएं पहुंची है, युवाओं को रोजगार मिला है, कृषकों को कृषि और उद्यान नीतियों से लाभ मिला है, महिलाओं के सशक्तिकरण की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचा है।
भ्रष्टाचार में छोटी मछली से लेकर बड़े मगरमच्छ तक नहीं बच सके हैं और लोगों का विश्वास सरकार पर बढ़ा है। हाल के दिनों में सरकार की कड़ी आलोचना करने वाले भी फिलहाल खाली बैठे हैं कि किस बात पर आलोचना की जाए, इसलिए कई बार ऐसे मुद्दों को उठाते हैं जिन पर उनका पसंदीदा दर्शक, पाठक वर्ग की उन्हें गरियाने पर उतर आता है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकार की तारीफ के कसीदे ही पढ़े जाए, सरकार की नीतियों की खामियों को उजागर कर उसकी आलोचना होना नितांत आवश्यक है ताकी सरकार जवाबदेह बनी रही।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की छवि इस मामले में पूर्व के मुख्यमंत्रियों से बेहतर रही है, उन्होंने जन संवाद के जरिए आलोचनाओं को सुना, उनसे सीखा और नीतियों में सुधार लाया। तमाम आलोचनाओं के बाद भी विरोधियों को गले लगाते रहे और उनके सुझावों को राज्य की विकास की यात्रा में शामिल कर राज्य हित में काम कर रहे हैं।







